स्मार्ट मीटर को लेकर फैली अफवाहें निकलीं फर्जी, चेक मीटर रिपोर्ट में नहीं मिला कोई अंतर

स्मार्ट मीटर क्रॉस चेक के दौरान पाए गए सही

झांसी।
स्मार्ट मीटर को लेकर लंबे समय से उपभोक्ताओं के बीच भ्रम और अफवाहें फैल रही थीं। कई उपभोक्ताओं का आरोप था कि स्मार्ट मीटर अधिक रीडिंग दर्ज करते हैं, जिससे बिजली बिल बढ़ जाता है। इन शिकायतों की सच्चाई जानने के लिए बिजली विभाग ने झांसी में एक विशेष जांच अभियान चलाया।

बिजली विभाग को झांसी जिले में कुल 71 उपभोक्ताओं से स्मार्ट मीटर की शिकायतें प्राप्त हुई थीं। इन शिकायतों के समाधान के लिए विभागीय टीम ने चेक मीटर लगाकर 20 दिनों तक स्मार्ट मीटर और चेक मीटर दोनों की रीडिंग दर्ज की। जांच अवधि समाप्त होने के बाद तैयार की गई 20 दिन की रिपोर्ट ने सभी अफवाहों को खारिज कर दिया।

चेक मीटर और स्मार्ट मीटर में नहीं मिला कोई अंतर

जांच रिपोर्ट के अनुसार, 71 में से किसी भी उपभोक्ता के मीटर में ऐसा कोई तकनीकी अंतर नहीं पाया गया जिससे अतिरिक्त रीडिंग दर्ज हुई हो। दोनों मीटरों की रीडिंग में समानता देखी गई। इस आधार पर यह स्पष्ट हो गया कि स्मार्ट मीटरों के अधिक बिल दिखाने की अफवाहें बिल्कुल निराधार और भ्रामक हैं।

बिजली विभाग की अपील

बिजली विभाग ने उपभोक्ताओं से अपील की है कि वे किसी भी प्रकार की अफवाहों पर ध्यान न दें। यदि किसी उपभोक्ता को बिल या मीटर रीडिंग को लेकर शंका है, तो वे विभागीय शिकायत केंद्र से संपर्क कर सकते हैं। विभाग का कहना है कि स्मार्ट मीटर पूरी तरह पारदर्शी और तकनीकी रूप से सुरक्षित हैं।

स्मार्ट मीटर क्यों बेहतर हैं?

विशेषज्ञों का मानना है कि स्मार्ट मीटर न केवल रीयल-टाइम रीडिंग प्रदान करते हैं, बल्कि बिजली चोरी रोकने, पारदर्शिता बढ़ाने और बिलिंग में गड़बड़ी समाप्त करने में भी मददगार हैं। यह मीटर सीधे सर्वर से जुड़ा होता है, जिससे किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ लगभग असंभव हो जाती है।

झांसी में 20 दिन की जांच रिपोर्ट के बाद यह साफ हो गया है कि स्मार्ट मीटर अधिक बिल का कारण नहीं हैं। यह मामला उन उपभोक्ताओं के लिए भी एक स्पष्ट संदेश है जो अफवाहों के शिकार होकर गलत धारणाएं बना लेते हैं।

 

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